Skip to content

दिसंबर 2025 में GST संग्रह में मजबूती — राजस्व ₹1.74-1.75 लाख करोड़ हुआ

भारत में दिसंबर 2025 में Goods and Services Tax (GST) का कुल सकल संग्रह ₹1.74 लाख करोड़ से ऊपर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष इसी महीने के ₹1.64 लाख करोड़ की तुलना में 6.1 % की वृद्धि दर्शाता है। इस आंकड़े में केंद्रीय, राज्य और इंटरग्रेटेड GST समेत सभी श्रेणियाँ शामिल हैं, जो देश में आर्थिक गतिविधियों की निरंतरता का संकेत देते हैं।

राजस्व संग्रह की यह वृद्धि खासतौर पर आयात-आधारित GST (Integrated GST / IGST) से हुई तेज़ वृद्धि के कारण रही, जबकि घरेलू बिक्री से मिलने वाला GST केवल सीमित बढ़ोतरी दिखाता है। भारत सरकार ने जो प्रोविजनल आंकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार IGST में लगभग 20 % की उछाल देखने को मिली जबकि घरेलू GST की बढ़त बहुत कम रही।

घरेलू बनाम आयात आधारित GST: क्या बदल रहा है राजस्व का पैटर्न?

घरेलू GST यानी भारत के भीतर होने वाली बिक्री पर मिलने वाला टैक्स संग्रह दिसंबर में लगभग ₹1.23 लाख करोड़ रहा, जिसमें केवल 1.2 % की वृद्धि हुई। यह धीमी वृद्धि कुछ हद तक GST दरों में कटौती और उपभोक्ता खर्च में नरमी के कारण है।

दूसरी ओर, आयात से मिलने वाला GST लगभग ₹51,977 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 19.7 % की वृद्धि दर्शाता है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत में व्यापारिक गतिविधियाँ और निर्यात-उन्मुख उत्पादन मजबूत बने हुए हैं, जिनके लिए कच्चा माल और सामग्री का आयात जारी है।

नेट GST और रिफंड का प्रभाव

कुल सकल GST संग्रह से रिफंड (Refunds) घटाने के बाद नेट GST राजस्व लगभग ₹1.45 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 2.2 % की वृद्धि को दर्शाता है। रिफंड्स में 31 % तक की वृद्धि दर्ज की गई, जो व्यापारियों और निर्यातकों को दिए गए टैक्स रिफंड की बढ़ी हुई प्रोसेसिंग के कारण है।

रिफंड में घरेलू क्लेम लगभग 62 % बढ़े, जबकि जो निर्यात-सम्बंधित रिफंड हैं, उनमें मामूली गिरावट देखने को मिली। इससे पता चलता है कि व्यापारिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए अधिक रिफंड्स दिए गए, जिससे व्यापारियों की नकदी प्रवाह में सुधार हुआ है।

GST दरों में बदलाव: संग्रह पर क्या असर पड़ा?

22 सितंबर, 2025 से लागू नई GST दर संरचना के तहत लगभग 375 वस्तुओं पर टैक्स दरों में कटौती की गई — बुनियादी वस्तुओं पर 5 % और मानक सामान पर 18 % जैसा नया बाइनरी स्लैब लागू हुआ। इससे कई वस्तुओं की कीमतें उपभोक्ता के लिए सस्ती हुईं, लेकिन इससे घरेलू GST संग्रह वृद्धि को थोड़ी मंदी का सामना करना पड़ा।

एक 40 % का अतिरिक्त “पाप/लक्जरी GST” स्लैब भी केवल सीमित उत्पादों (जैसे तंबाकू इत्यादि) पर लागू है, जिससे कुल राजस्व संग्रह की मजबूती बनी रहती है।

राज्यों और केन्द्र के हिस्से का वितरण

दिसंबर 2025 में एकत्र किए गए कुल GST राजस्व में से केन्द्र और राज्यों के बीच निर्धारित फार्मूले के अनुसार हिस्सेदारी की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय GST (CGST) से लगभग ₹34,000 करोड़, जबकि राज्य GST (SGST) के रूप में करीब ₹41,000 करोड़ का संग्रह दर्ज किया गया। वहीं एकीकृत GST (IGST) का हिस्सा सबसे अधिक रहा, जो लगभग ₹98,000 करोड़ के आसपास रहा। IGST से प्राप्त राजस्व को बाद में उपभोग के आधार पर केन्द्र और राज्यों के बीच बांटा जाता है, जिससे राज्यों को भी नियमित और स्थिर राजस्व प्राप्त होता है। यह वितरण व्यवस्था दर्शाती है कि GST प्रणाली के तहत केन्द्र और राज्यों — दोनों को समान रूप से वित्तीय मजबूती मिल रही है और संघीय ढांचे में राजस्व संतुलन बना हुआ है।

आर्थिक संकेत और आगे का परिदृश्य

GST संग्रह में 6 % से अधिक की वृद्धि इस बात का संकेत है कि आर्थिक गतिविधियाँ स्थिर बनी हुई हैं और कर अनुपालन बेहतर हुआ है। हालांकि घरेलू बिक्री की अपेक्षाकृत कम वृद्धि यह भी दिखाती है कि उपभोक्ता मांग अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है, लेकिन आयात-आधारित राजस्व ने कुल संग्रह को संतुलित रखा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि GST प्रशासन की दक्षता और ऑनलाइन अनुपालन प्लेटफॉर्म की मजबूती ने संग्रह में निरंतरता लाने में मदद की है, जिससे न सिर्फ सरकार की राजस्व स्थिति मजबूत रही, बल्कि नीति निर्णयों को भी समर्थन मिला है।

निष्कर्ष: सरकार का GST राजस्व पर मजबूत नियंत्रण

दिसंबर 2025 का आंकड़ा यह पुष्टि करता है कि भारत का GST ढांचा कर संग्रह में प्रभावी और टिकाऊ है, और आयात-आधारित राजस्व वृद्धि घरेलू बिक्री की धीमी गति को पर्याप्त रूप से संतुलित कर रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती और राजकोषीय संतुलन दोनों का एक स्थायी मिश्रण बन रहा है, जो आगे आने वाले महीनों में सरकार को आर्थिक योजनाओं तथा बजटीय व्यय हेतु मजबूती प्रदान करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *