कर्नाटक और तमिलनाडु में फर्जी कंपनियों के जरिए वर्षों से चल रहा था टैक्स फ्रॉड
कर्नाटक और तमिलनाडु में सामने आया ₹1,464 करोड़ का GST घोटाला देश के बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए दर्जनों शेल कंपनियां बनाई गई थीं, जिनका वास्तविक व्यापार से कोई संबंध नहीं था। इन कंपनियों के माध्यम से सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया और लंबे समय तक यह नेटवर्क जांच एजेंसियों की नजर से बचता रहा।

आईएएस कनिष्क शर्मा के नेतृत्व में चला बड़ा जांच अभियान
इस पूरे मामले की जांच कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग की प्रवर्तन शाखा द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व आईएएस अधिकारी कनिष्क शर्मा ने किया। वे वर्तमान में विभाग में अतिरिक्त आयुक्त (प्रवर्तन–दक्षिण) के पद पर तैनात हैं। उनकी अगुवाई में संदिग्ध GST रजिस्ट्रेशन, असामान्य टैक्स क्रेडिट दावों और बैंक लेन-देन का गहन विश्लेषण किया गया, जिसके बाद इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
फर्जी कंपनियों के सहारे इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केवल कागजों पर कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर GST चालान जारी किए। वास्तव में न तो कोई माल खरीदा गया और न ही उसकी आपूर्ति हुई, लेकिन दस्तावेजों में करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का दावा किया गया। अब तक की जांच में लगभग ₹355 करोड़ के फर्जी ITC की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पूरे नेटवर्क का आंकलन ₹1,464 करोड़ तक आंका जा रहा है।
ITC असल में क्या होती है और इसका दुरुपयोग कैसे किया गया
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC, GST प्रणाली का एक अहम प्रावधान है, जिसके तहत व्यापारी अपने द्वारा खरीदे गए माल या सेवाओं पर चुकाए गए GST को आगे बेचते समय देय टैक्स से घटा सकता है। इसका उद्देश्य दोहरी कराधान से बचाना और व्यापार को सरल बनाना है। लेकिन इस मामले में बिना किसी वास्तविक खरीद या आपूर्ति के फर्जी चालान बनाकर ITC का दावा किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
निर्माण सामग्री के नाम पर किया गया बड़ा खेल
घोटाले को वास्तविक दिखाने के लिए सीमेंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्री को लेन-देन का आधार बनाया गया। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनमें बड़े पैमाने पर कारोबार सामान्य माना जाता है, इसी कारण फर्जी लेन-देन को लंबे समय तक छिपाए रखना संभव हो सका।
दक्षिण से उत्तर भारत तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि यह घोटाला केवल कर्नाटक और तमिलनाडु तक सीमित नहीं था। इसके तार झारखंड के जमशेदपुर, बिहार और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों से भी जुड़े पाए गए। अलग-अलग राज्यों में फर्जी फर्में बनाकर पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था।
चार आरोपी गिरफ्तार, डिजिटल सबूतों की जांच जारी
अब तक इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, फर्जी कंपनियों की मुहरें और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
GST सिस्टम की तकनीकी सख्ती से उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
कर विभाग का कहना है कि GST नेटवर्क में डेटा एनालिटिक्स, ई-वे बिल निगरानी और ITC मिलान प्रणाली मजबूत होने से ऐसे फर्जीवाड़े अब ज्यादा समय तक छिप नहीं सकते। यह मामला दर्शाता है कि तकनीकी सख्ती से पुराने और संगठित टैक्स घोटाले भी सामने आ रहे हैं।
कौन हैं आईएएस कनिष्क शर्मा, जिनके नेतृत्व में हुआ खुलासा
इस बड़े GST घोटाले का पर्दाफाश करने वाले आईएएस कनिष्क शर्मा मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर के निवासी हैं। वे 2021 बैच के कर्नाटक कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनके पिता प्रभात शर्मा, टाटा स्टील के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद कनिष्क शर्मा ने राजस्व और प्रवर्तन से जुड़े मामलों में सख्त और पारदर्शी कार्यशैली से पहचान बनाई है।
राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई न केवल एक बड़े टैक्स घोटाले का खुलासा है, बल्कि यह उन लोगों के लिए सख्त संदेश भी है जो GST प्रणाली का दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में टैक्स रिकवरी और कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।