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प्रतापगढ़ में कर वसूली को लेकर राज्य कर विभाग सख्त, 20 करोड़ रुपये के बकायेदार व्यापारियों की तलाश तेज

  • GST News

प्रतापगढ़ जनपद में राज्य कर विभाग ने बड़े पैमाने पर टैक्स बकाया रखने वाले व्यापारियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जिले में ऐसे कई व्यापारी हैं, जिन पर कुल मिलाकर लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक का कर बकाया है, लेकिन उनका वर्तमान में कोई ठोस पता उपलब्ध नहीं है। इस वजह से सरकारी राजस्व की वसूली प्रभावित हो रही है।

जानकारी के अनुसार विभाग की टीम जब बकायेदार व्यापारियों के पंजीकृत पते पर पहुंची तो कई स्थानों पर दुकानें बंद मिलीं। कुछ जगहों पर वर्षों से ताले लटके होने की स्थिति सामने आई, जबकि आसपास के लोगों ने बताया कि संबंधित कारोबारी काफी समय पहले ही वहां से कारोबार समेटकर जा चुके हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया कि व्यापारियों ने पता बदला, लेकिन इसकी सूचना विभाग को नहीं दी।

राज्य कर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रतापगढ़ जिले में करीब 9 हजार पंजीकृत व्यापारी हैं। इनमें लोहे, सीमेंट, सरिया, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटो पार्ट्स, कपड़ा, जूते, किराना और अन्य वस्तुओं का व्यापार करने वाले कारोबारी शामिल हैं। नियमों के तहत इन सभी को समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल करना और कर जमा करना अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में व्यापारी लंबे समय से टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई व्यापारी कारोबार बंद करने के बाद भी पंजीकरण निरस्त नहीं कराते और न ही बकाया कर की जानकारी देते हैं। इससे कर वसूली की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। अब विभाग ऐसे मामलों में चल-अचल संपत्ति की पहचान कर वसूली की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जाएगी।कर वसूली को लेकर विभाग को प्रत्येक माह लक्ष्य दिया जाता है, लेकिन हाल के महीनों में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वसूली नहीं हो पाई है। नवंबर माह में जहां लगभग पांच करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा गया था, वहीं वास्तविक वसूली इससे काफी कम रही। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए विभाग ने निगरानी और जांच को और सख्त कर दिया है।

विभाग का कहना है कि जिन व्यापारियों पर टैक्स बकाया है, उन्हें जल्द से जल्द सामने आकर अपना बकाया जमा करना चाहिए। अन्यथा उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होने की संभावना है, ताकि सरकारी राजस्व की हानि को रोका जा सके और कर प्रणाली को मजबूत बनाया जा सके।

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