सरकार की अधिसूचना से GST व्यवस्था में बड़ा बदलाव
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी 2026 से GST मुआवजा सेस (GST Compensation Cess) को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर नया टैक्स सिस्टम लागू किया जाएगा। यह फैसला पहले ही GST परिषद की 56वीं बैठक में लिया जा चुका था, जिसे अब कानूनी रूप दे दिया गया है।अब बीड़ी पर 18 प्रतिशत GST लगाया जाएगा, जबकि पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत GST की दर लागू होगी।
2017 में क्यों लगाया गया था GST मुआवजा सेस
GST लागू होने के समय वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने राज्यों को यह भरोसा दिया था कि उन्हें कर राजस्व में किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्यों को 14 प्रतिशत वार्षिक राजस्व वृद्धि की गारंटी दी गई थी। इसी उद्देश्य से सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला और अन्य कुछ वस्तुओं पर GST मुआवजा सेस लगाया गया था, ताकि राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके।
कोविड काल के बाद बदली स्थिति
कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार ने इसी सेस के आधार पर कर्ज लिया था। अब जब उस कर्ज की भरपाई लगभग पूरी हो चुकी है और मुआवजा अवधि भी समाप्त हो चुकी है, तो सरकार ने इस सेस को खत्म करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि अब इस अस्थायी व्यवस्था को जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।
सेस खत्म, लेकिन टैक्स बोझ बरकरार
GST मुआवजा सेस के समाप्त होने का यह अर्थ नहीं है कि तंबाकू और पान मसाला उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि इन उत्पादों पर कर भार बनाए रखने के लिए नई कर संरचना लागू की जाएगी। इसके तहत मौजूदा GST दरें जारी रहेंगी, लेकिन इनके साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और विशेष सेस लगाए जाएंगे।
पुरानी व्यवस्था में कंपनियों को मिलता था फायदा
अब तक की व्यवस्था में बीड़ी पर 5 से 12 प्रतिशत तक GST लगाया जाता था, जबकि मशीन से बनी बीड़ी पर 28 प्रतिशत टैक्स लागू था। वहीं पान मसाला और तंबाकू जैसे उत्पादों पर 28 प्रतिशत GST के साथ अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता था।
इस जटिल टैक्स ढांचे का फायदा उठाकर कई कंपनियां अपने उत्पादों की श्रेणी बदलकर या गलत वर्गीकरण दिखाकर कम टैक्स चुकाती थीं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था। नई व्यवस्था में टैक्स दरों को स्पष्ट और सीमित करके सरकार ने इस तरह की टैक्स चोरी और हेराफेरी पर रोक लगाने की कोशिश की है।
पान मसाला और तंबाकू पर अलग-अलग टैक्स व्यवस्था
नई व्यवस्था के अनुसार पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों पर हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा, जबकि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू होगी। सरकार का कहना है कि इससे कर संग्रह में स्थिरता बनी रहेगी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों पर नियंत्रण भी संभव होगा।