झांसी / नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI ने उत्तर प्रदेश के झांसी में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) कार्यालय से जुड़े एक बड़े रिश्वतखोरी रैकेट (Bribery Racket) का भंडाफोड़ करते हुए एक वरिष्ठ IRS अधिकारी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि GST चोरी और टैक्स मामलों में आरोपित व्यापारी को राहत देने के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी, जिसमें से पहली किश्त 70 लाख रुपये के रूप में दी जा रही थी।
CBI ने 30 दिसंबर को दर्ज मामले के बाद विशेष ट्रैप ऑपरेशन चलाया और दो CGST सुपरिटेंडेंट्स को 70 लाख रुपये नकद लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इस कार्रवाई के तुरंत बाद IRS अधिकारी प्रभा भंडारी, जो झांसी CGST कार्यालय में डिप्टी कमिश्नर के रूप में तैनात थीं, को भी गिरफ्तार किया गया। साथ ही वकील नरेश कुमार गुप्ता और हार्डवेयर व्यापारी राजू मंगतानी को भी आरोपित किया गया।
कैसे पकड़ में आए आरोपित?
CBI को गुप्त सूचना मिली थी कि झांसी CGST अफसरों के एक गिरोह ने निजी कंपनियों के खिलाफ चल रहे GST चोरी मामलों को छोडऩे के लिए रिश्वत लेने की रणनीति बनाई थी। एजेंसी ने इस सूचना के आधार पर जाल बिछाया और दो सुपरिटेंडेंट को 70 लाख रुपये स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया। आरोपितों ने स्वीकार किया कि यह रकम IRS अधिकारी प्रभा भण्डारी के निर्देशन में ली जा रही थी, जिन्होंने कुल 1.5 करोड़ रुपये की मांग तय की थी।
जांच में पता चला कि राशि की पहली किश्त के रूप में 70 लाख रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि बाकी रकम शेष थी। CBI ने गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान पाया कि प्रभा भंडारी की भूमिका मुख्य रूप से उस नेटवर्क को संचालित करने वाली थी। टीम ने सुपरिटेंडेंट का फोन रिकॉर्ड और बातचीत का सबूत भी जब्त किया है, जिसमें पैसे को सोने में बदलकर देने जैसे निर्देश भी मिले थे।
राहत, छापेमारी और बरामदगी
गिरफ्तारी के तुरंत बाद CBI ने आरोपितों के ठिकानों पर भी छापेमारी की। इस दौरान लगभग 90 लाख रुपये नकद, महंगा सोना-चांदी का जेवर, ज्यादा कीमती दस्तावेज, और कई संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए। अब तक कुल लगभग 1.60 करोड़ रुपये की संपत्ति और नकदी सीज़ हो चुकी है। यह रकम केवल कैश ही नहीं, बल्कि भारी ज्वेलरी और अन्य कीमती वस्तुओं को भी शामिल करती है, जो अधिकारियों और आरोपी पक्ष के कई ठिकानों से मिली।
सरकारी और कानूनी प्रक्रिया
CBI ने मामले में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को मेडिकल टेस्ट के बाद कोर्ट में पेश किया गया है, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। CBI का कहना है कि पूरे मामले का पूरी तरह विस्तृत जांच और पैसों के प्रवाह का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त कदम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब GST चोरी और रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों पर सरकारी नजरिया और सख्ती बढ़ी हुई है।
IRS अधिकारी प्रभा भंडारी कौन हैं?
इस आरोपित घोटाले का मुख्य नाम प्रभा भंडारी है, जो कि भारतीय राजस्व सेवा (Indian Revenue Service – C&IT) के 2016 बैच की अधिकारी हैं और अभी सीजीएसटी (CGST) कार्यालय, झांसी में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थीं।
प्रभा भंडारी की राजस्व सेवा में भर्ती 2016 में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने कई कस्टम, GST और Indirect Taxes से जुड़े विभागों में कार्य किया। उनके पास IRS-C&IT अधिकारी के तौर पर टैक्स प्रशासन और कर निगरानी के महत्वपूर्ण दायित्व थे।
हालिया कार्रवाई में CBI के जाल में प्रभा भंडारी तब फंसीं, जब एजेंसी को पता चला कि उनके निर्देश पर GST मामलों में राहत देने के एवज में भारी रिश्वत मांगी जा रही थी। पूछताछ में गिरफ्तार दो सुपरिटेंडेंट ने बताया कि प्रभा भंडारी ने कुल 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत तय की थी और इसी डील का पहला हिस्सा 70 लाख रुपये पहले ही लिया जा चुका था।
सीबीआई ने यह भी कहा है कि प्रभा भंडारी की तैनाती झांसी में लगभग छह महीने पहले ही हुई थी, और इसी कम समय के भीतर ही उन्होंने कथित रूप से कई कीमती संपत्तियाँ खरीदीं, जिनमें फ्लैट, सोना-चांदी और अन्य निवेश भी शामिल हैं, जो अब मामले की जांच में सबूत के रूप में देखे जा रहे हैं।
उनके निजी जीवन से जुड़ी एक और जानकारी यह है कि उनका जीवनसाथी भारतीय सेना (Indian Army) में कर्नल के रैंक पर सेवा दे रहे हैं, जो इस मामले की संवेदनशीलता और चर्चा को और अधिक बढ़ाता है।
संपादकीय टिप्पणी: व्यवस्था पर सवाल
सरकारी पद और अधिकार जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि निजी लाभ के लिए। जिस अधिकारी के कंधों पर कर व्यवस्था की निष्पक्ष निगरानी की जिम्मेदारी होती है, उसी का रिश्वत जैसे गंभीर आरोपों में घिर जाना न केवल कानून व्यवस्था पर, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। ऐसे मामले ईमानदारी से काम करने वाले हजारों अधिकारियों की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून लागू कराने वाले ही अगर कानून तोड़ने लगें, तो आम नागरिक का भरोसा कमजोर होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेंगी, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करने का साहस न कर सके।