लेखक: Janmattak.com Team
बरेली (उत्तर प्रदेश) में पुलिस ने लगभग 24 करोड़ रुपये के हवाला और GST से जुड़ी धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार यह रैकेट कई फर्जी कंपनियों और नकली खातों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर कर चोरी और अवैध धन लेन‑देन करता रहा है।
जांच की शुरुआत और फर्जी खातों का खुलासा
मामला तब उजागर हुआ जब एक छोटे व्यापार के मालिक को उसके नाम पर 1.5 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स नोटिस मिला। जांच के दौरान पता चला कि उसके नाम का इस्तेमाल कई फर्जी फर्मों और “म्यूल अकाउंट्स” खोलने के लिए किया गया था। आरोपियों ने व्यापारियों और आम लोगों से उनके आधार और PAN कार्ड हासिल किए और इन फर्जी खातों के माध्यम से फर्जी बिल और इनवॉइस तैयार कर GST में धोखाधड़ी की।

इस पूरे मामले की तफ्तीश बरेली पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) IPS अंशिका वर्मा के नेतृत्व में की जा रही है। अंशिका वर्मा 2021 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर IPS अधिकारी हैं और वर्तमान में बरेली दक्षिण के SP (South) के रूप में तैनात हैं। इन्होंने UPSC परीक्षा पास की और कई महत्वपूर्ण केसों का खुलासा किया। उनके नेतृत्व में महिला सुरक्षा और कानून‑व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिले में कई पहलें शुरू की गई हैं।
फर्जी कंपनियों का जाल
जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्जी कंपनियों का नेटवर्क बनाया गया था, जिनमें प्रमुख कंपनियां Satya Sahab Traders, Mahavir Trading Company, Mahakal Traders और Sumit Traders शामिल थीं। ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और इनका इस्तेमाल GST बिलिंग और कर चोरी के लिए किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन फर्मों और म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से पिछले एक वर्ष में लगभग 24 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन‑देन किया गया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों की पहचान शाहिद अहमद (38) और अमित गुप्ता (38) के रूप में की। दोनों को भुता क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से कई मोबाइल फोन, नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और फर्मों की पहचान करने के लिए गहन जांच कर रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क छोटे व्यापारियों और मजदूरों के नाम पर बनाए गए म्यूल अकाउंट्स का दुरुपयोग करते हैं। लोग अपने नाम और दस्तावेज बिना जानकारी दिए इन अकाउंट्स में इस्तेमाल होने देते हैं। अधिकारियों ने नागरिकों को अपने PAN और बैंक अकाउंट का ध्यान रखने और किसी भी संदिग्ध लेन‑देन की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है।
निष्कर्ष
इस मामले से यह स्पष्ट हुआ कि छोटे और बड़े व्यापारियों के फर्जी दस्तावेज और म्यूल अकाउंट्स का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर कर चोरी और अवैध धन लेन‑देन किया जा सकता है। इसे रोकने के लिए सरकार और कर विभाग को निगरानी बढ़ानी होगी और व्यापारियों को अपने दस्तावेज सुरक्षित रखने की सतत सलाह दी जानी चाहिए।