उत्तर प्रदेश में GST चोरी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। ई-वे बिल तैयार कर फर्जी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी कराने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
मुरादाबाद / लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) चोरी के मामलों पर शिकंजा कसते हुए पुलिस और राज्य कर विभाग को बड़ी सफलता मिली है। करोड़ों रुपये की GST चोरी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के अहम आरोपी परविंदर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह फर्जी कंपनियों के नाम पर ई-वे बिल जनरेट कर टैक्स चोरी कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
कैसे सामने आया पूरा मामला
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मुरादाबाद में राज्य कर विभाग की टीम ने नियमित जांच के दौरान दो ट्रकों को रोका। इन ट्रकों में लोहे का स्क्रैप भरा हुआ था, लेकिन उनके साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि माल जिन फर्मों के नाम पर दिखाया जा रहा था, वे वास्तव में कागजों पर बनी फर्जी कंपनियां थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि एक ही मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान के जरिए 100 से अधिक बोगस फर्मों का पंजीकरण किया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
पंजाब से हुई गिरफ्तारी
SIT की तकनीकी और डिजिटल जांच के बाद पुलिस आरोपी परविंदर तक पहुंची, जिसे पंजाब से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से ई-वे बिल सिस्टम का दुरुपयोग कर रहा था और विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क को तकनीकी सहायता दे रहा था।
आरोपी के पास से क्या-क्या बरामद हुआ
- एक लैपटॉप, जिसमें लगभग 500 से अधिक फर्जी फर्मों का डेटा
- चार मोबाइल फोन
- तीन सिम कार्ड
- पैन कार्ड और आधार कार्ड सहित अन्य डिजिटल दस्तावेज
पुलिस का कहना है कि ये डिजिटल सबूत इस पूरे GST चोरी नेटवर्क की रीढ़ साबित हो सकते हैं और आगे कई और गिरफ्तारियों का रास्ता खोल सकते हैं।
क्या होता है ई-वे बिल और कैसे होता है दुरुपयोग
GST कानून के तहत यदि ₹50,000 से अधिक मूल्य का माल एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया जाता है, तो ई-वे बिल बनाना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य माल की आवाजाही को पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है।
हालांकि, कुछ संगठित गिरोह फर्जी GST रजिस्ट्रेशन, नकली इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए ऐसा दिखाते हैं जैसे वास्तविक व्यापार हो रहा हो, जबकि असल में केवल कागजों पर लेन-देन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अवैध निकासी की जाती है।
देशभर में बढ़ते GST फ्रॉड के मामले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में देशभर में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की GST चोरी का पता लगाया गया है। प्रवर्तन एजेंसियों ने हजारों फर्जी फर्मों को चिन्हित किया है, जिनका उपयोग केवल टैक्स चोरी के लिए किया गया।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ई-वे बिल और फर्जी इनवॉइस के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के मामले सामने आ चुके हैं।
जांच अभी जारी, और खुलासों की उम्मीद
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के पास से बरामद डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। आशंका है कि इस नेटवर्क में कई चार्टर्ड अकाउंटेंट, ट्रांसपोर्टर और शेल कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।
आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
यह कार्रवाई केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि GST चोरी के खिलाफ चल रही बड़ी मुहिम का हिस्सा है। ई-वे बिल प्रणाली के दुरुपयोग पर सख्ती से नकेल कसना सरकार और कर प्रशासन की प्राथमिकता बन चुकी है।
सरकारी एजेंसियों का स्पष्ट संदेश है — फर्जी कंपनियों और डिजिटल टैक्स फ्रॉड के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।